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From Principal’s Pen

आजकल हमारी युवा पीढ़ी की मानसिक दशा कैसी हो गयी है यह कोई नहीं समझ पा रहा है। छोटी-छोटी बातों पर क्रोधित होने लग गए हैं। यह बीमारी सभी आयुवर्गों के लोगों में देखी जाने लगी है। हमारी सहनशक्ति काफी क्षीण हो गयी है। हमारा स्वीकारोक्ति भाव विलुप्त होता जा रहा है तथा नकारने की प्रवृति बढ़ती जा रही है जिस कारण सभी लोग तनाव की स्थिति में रहने लगे हैं। इससे उबरने के लिए हम विभिन्न आश्रमों व ज्ञानीजनों की शरण में जाने लगे हैं और ऐसा देखा जा रहा है कि वहाँ भी मानसिक शांति की प्राप्ति नही हो रही है। शांत व अशांत ये एक मानसिक स्थिति है जो हमारे संतुष्ट अथवा असंतुष्ट होने पर या प्रसन्नता अथवा अप्रसन्नता की स्थिति से उत्पन्न होती है। यह सिर्फ मानसिक नियंत्रण से ही दूर की जा सकती है।

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